नई दिल्ली। भारत में अगर कोरोना की तीसरी लहर आती है तो यह दूसरी लहर जितनी गंभीर नहीं होगी। इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईजेएमआर) में प्रकाशित एक नए अध्ययन में यह दावा किया गया है। गणितीय मॉडल से किए गए विश्लेषण पर आधारित इस अध्ययन में टीकाकरण के विस्तार से तीसरी लहर के संभावित प्रकोप में काफी हद तक कमी आने की संभावना जताई गई है। अध्ययन में ऐसे परिदृश्य की चर्चा की गई है, जिसमें 40 फीसदी आबादी ने दूसरी लहर के तीन महीनों के भीतर दोनों खुराक ले ली हैं। इसमें कहा गया है कि टीकाकरण का प्रभाव संक्रमण की गंभीरता को 60 प्रतिशत तक कम करने के लिए है। इससे यह दिखता है कि संभावित तीसरी लहर के दौरान टीकाकरण गंभीरता को काफी हद तक कम कर सकता है। तीसरी लहर के संबंध में चार परिकल्पनाओं पर विचार करते हुए अध्ययन में कहा गया है कि संक्रमण-आधारित प्रतिरक्षा क्षमता समय के साथ कम हो सकती है, पहले से संक्रमित हुए लोग पुन: संक्रमित हो सकते हैं, भले ही मौजूदा वायरस अपरिवर्तित रहे। बता दें कि कोरोना की दूसरी लहर ने पहली की तुलना में भारत के अंदर खूब तबाही मचाई है। एम्स चीफ सहित कई एक्सपर्ट्स ने यह कहा है कि सितंबर-अक्टूबर माह में भारत में कोरोना वायरस की तीसरी लहर आ सकती है। देश में कोरोना का डेल्टा प्लस वैरिएंट मिलने के बाद से ही कहा जा रहा है कि यह तीसरी लहर का कारण बन सकता है। डेल्टा प्लस वैरिएंट मिलने की वजह से केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने तमिलनाडु, गुजरात, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, पंजाब, जम्मू-कश्मीर और हरियाणा को कंटेनमेंट और कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग जैसे उपायों को अपनाने को कहा है। डेल्ट प्लस वैरिएंट अधिक संक्रामक है और फेफड़ों की कोशिकाओं में रिसेप्टर्स का मजबूत बंधन होता है तो मोनोकोनल एंटीबॉडी रिस्पॉन्स को भी संभवत: कम कर सकता है।

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